हम मानव जिन तत्वों से चारो ओर से घिरे हुए हैं, उन्हीं तत्वों के मिले हुए स्वरूप को पर्यावरण कहा जाता है और इन तत्वों में से कुछ तत्वों के मात्रा में असंतुलन को ही प्रदूषण कहा जाता है। इसी प्रदूषण को आज से लगभग 9 वर्षों पूर्व सुनील रामदास ने अपनी दूरदर्शिता से भांप लिया था और उसे कारण मानकर उन्होंने अपने माता-पिता के नाम से रामदास द्रौपदी फाउंडेशन की स्थापना की। जिसके द्वारा हर वर्ष 50 हजार पौधे क्षेत्र में रोपित किए जाते हैं।
हमारी आवश्यकताओं की पूर्ति उसी समाज से होती है, जिस समाज में हम निवास करते हैं। इसलिए पुनः उसी समाज में हम अपनी आर्थिक, मानसिक और शारीरिक योगदान को सेवा के रूप में लौटाते हैं। इस कार्य को सुव्यवस्थित ढंग से करने के लिए सुनील रामदास ने वर्ष 2014 में उक्त संस्था की स्थापना की। जिसमें पर्यावरण संरक्षण के अतिरिक्त शिक्षा, चिकित्सा, कौशल विकास, वस्तु पुनर्प्रयोग, खेल विकास, महिला शसक्तिकरण, जल संरक्षण आदि क्षेत्रों में कार्य किया जाता है।
मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और समाज व्यक्ति से व्यक्ति के एकीकरण से बनता है। इसका निर्माण हम मानवों द्वारा संगठित होकर अपने समस्याओं और कठिनाइयों से निराकरण के लिए किया गया है। सांस्कृतिक और पारिवारिक पृष्ठभूमि से मिली भारत के इस चिंतन को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से सुनील रामदास ने सेवा के माध्यम से समाज को नई दिशा देने का कार्य किया है। जिसमें आजपर्यंत क्षेत्र के कई विद्यालय पेडों से आच्छादित हो चुके हैं। वहीं अन्य 9 सेवा आयामों से क्षेत्र के सैकड़ों लोगों के कठिनाइयों को निराकृत किया गया है।