भारत विश्व का सबसे पुरातन संस्कृति वाला देश है और भारतीय सभ्यता विश्व की सबसे पुरातन सभ्यता के साथ-साथ विश्व की समृद्ध सभ्यता भी है। इस विषय पर चिंतकों का तर्क है कि जिस समाज का चिंतन जितना समृद्ध होता है, उतनी ही समृद्ध उसकी सभ्यता भी होती है। वस्तुतः वेदों से आरम्भ होने वाली सभ्यता स्वभाविक रूप से वैज्ञानिक मानकों के साथ-साथ लोक व्यवहारों में भी समृद्ध होगी ही। यही कारण है कि भारत की लोक चेतना में स्थापित सेवा परमों धर्मः का भाव व्यवहारिक जीवन में भी परिलक्षित होता है और यही भाव भारत के संस्कृति को दूसरे संस्कृतियों से अलग तथा विशेष बनाता है। सांस्कृतिक और पारिवारिक पृष्ठिभूमि से मिली इस चिंतन को साकार करने के लिए श्रीमान सुनील रामदास द्वारा वर्ष 2014 में अपने माता-पिता के समक्ष उनके ही नाम पर रामदास द्रौपदी फाउंडेशन की स्थापना की गयी। जिसके माध्यम से उन्होंने अपने माता-पिता के समक्ष ही यह रेखांकित किया कि आप से मिले चिंतन को समाज के उत्थान और जगत के कल्याण की दिशा में हमारे द्वारा उपयोग जा रहा है। यह संस्थान भारतीय चिंतन से निकलने वाला लोककल्याण का एक माध्यम मात्र है।